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कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय, वा खाये बौराये नर, वा पाए बौराये

 "कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय, वा खाये बौराये नर, वा पाए बौराये |"

यहाँ पहले कनक का मतलब है "धतूरा" जो की एक मादक/नशीला  पदार्थ है |
दूसरे कनक का मतलब है "सोना" (gold) |

भावार्थ- सोने की मादकता धतूरे से भी सौ गुनी ज्यादा है. धतूरे को खाने पर लोग बौराते हैं (मतलब नशे में आ जाते हैं ) परन्तु सोने को पाने मात्र से लोग बौरा जाते हैं |

यह यमक अलंकार का उदाहरण है |

यमक अलंकार -  इसमें अलग अलग जगहों में प्रयुक्त एक ही शब्द के अलग अलग भावार्थ होते हैं |

जैसे: "काली घटा का घमंड घटा |"

भावार्थ -   काले बादल हट/छँट गए |

यहाँ घटा दो जगह प्रयुक्त हुआ है परन्तु दोनों जगह उसके अर्थ भिन्न हैं | पहली "घटा" का अर्थ है "बादल" एवं दूसरी घटा का भावार्थ है "कम होना" |


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